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शुक्रवार, 19 जुलाई 2024
शनिवार, 9 सितंबर 2023
जनता की फिक्र किसको और क्यों नहीं?
जनता की फिक्र किसको और क्यों नहीं?
आज के परिदृश्य में जनता की क्षेत्र किस नेताओं ने सिर्फ और सिर्फ वोट की राजनीति के जनता को मोहरा बना रखा है उनकी समस्याएं उनकी परेशानियां उनके बच्चों का भविष्य और उनकी कमाई से नेताओं को कोई भी लेना देना नहीं ।
एक समय था जब राम मनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र जैसे नेता जनता की परेशानियों के लिए हमेशा संघर्ष करते हुए नजर आते थे।
आज जब हम देखने चलते हैं तो देखने को मिलता है कि आज के राजनेता सिर्फ और सिर्फ वोट कहां से वह समेट सकते हैं इसके लिए कसरत करते नजर आते हैं अगर जनता की समस्या उनके लिए सर्वोपरि हो तो निश्चित रूप से आम जनमानस की समस्या समाप्त करना कोई बहुत बड़ी चुनौती नहीं होगी लेकिन जिस तरह का दृश्य आज पार्टी और पार्टी के नेताओं का देखने को मिलता है और जिस तरह का उनका आचरण दिखता है उसमें सिर्फ और सिर्फ एक चीज दिखाई देता है कि उन्हें खुद को बने रहने के लिए और अपनी पार्टी के बने रहने के लिए जनता से झूठे वादे करना जनता को धोखा देना वादे करने के बाद मुकर जाना इस तरह का चरित्र आज के नेताओं में दिखाई देता है जो की
जो की आने वाले भविष्य की राजनीति का एक पूरा संकेत देता है आपको याद होगा राम मनोहर लोहिया जी जिन्हें छोटे लोहिया कहा जाता है जनेश्वर मिश्र जी ऐसे ही आप काशीराम जी को ले ले जितने भी इस तरह के नेता समाज से गुजरे हैं उनके पास अपनी निजी संपत्ति के नाम पर ज्यादा कुछ देशवासियों को देखने को नहीं मिला लेकिन जितना प्यार जितना सम्मान उन्होंने जनता से समेत जनता ने जितना उनको सम्मान दिया जितना उनको प्यार दिया आज भी उनको मिलता रहता है क्योंकि उन्होंने जनता के दर्द को अपने दिल में समा लिया था और जिसका यह नतीजा है कि आज भी हम उन्हें याद करते हैं और सम्मान करते हैं उनकी पुण्यतिथि पर उनकी जयंती पर क्यों याद करते हैं क्योंकि उन्होंने जनता के दर्द को बहुत करीब से देखा और उनके लिए पूरा जीवन लगा दिया
वहीं पर अगर आज हम लोग देखेंगे तो मालूम यह चलता है कि आज के राजनेता उन्हें सिर्फ और सिर्फ जनता एक गिनती के रूप में वह देखता है।
वह देखता है कि जिसके पास हम जा रहे हैं वहां से हमारे वोट कितने पूरे होंगे और हमारे पास कितनी सीटें और पा सकते हैं।
जिस तरह की राजनीति का आज मुशायरा किया जा रहा है उसमें धनबल बाहुबल और जोड़-तोड़ की राजनीति के सिवा कुछ नहीं है आम जनमानस की समस्या उसके लिए कोई अहमियत नहीं रखती है ऐसी राजनीति ज्यादा समय के लिए नहीं होती और ऐसे राजनेता ज्यादा दिन तक याद भी नहीं किए जाते।
रविवार, 13 अक्टूबर 2019
हिन्दू , मुस्लिम या इंसान
आज का सवाल आप क्या हो हिन्दू या मुसलमान या इंसान ??
हिंदुस्तान की आवाज दीजिए बहुत बड़ा सवाल है क्योंकि आज की स्थिति में पूरे भारतवर्ष के अंदर किस-किस तरह की जाति धर्म के आधार पर बंटवारा चल रहा है क्योंकि बहुत ही नुकसानदायक है हिंदुस्तान के लिए उम्मीद करता हूं की भारतवर्ष की आवाम इस पर अपनी राय जरूर देगी ।